एक पड़ोसी बस अपनी बालकनी से रात को रिकॉर्ड करना चाहता था। उसे ज़रा भी उम्मीद नहीं थी कि सामने वाली खिड़की में उसे दादा-दादी की एक जोड़ी रोमांटिक गीत पर एक-दूसरे की बाहों में नाचती हुई दिखाई देगी।

कोई उन्हें नहीं देख रहा था। उन्हें इसका पता नहीं था। वे धीरे-धीरे नाच रहे थे, मानो उनके पास दुनिया भर का समय हो, मानो वह गीत दशकों से दोबारा बजने के लिए उनका इंतज़ार कर रहा हो। वीडियो सोशल मीडिया तक पहुँचा और कुछ ही घंटों में फैल गया। हज़ारों लोगों ने एक ही बात पर टिप्पणी की: वह नृत्य, जिसे देखने वाला कोई नहीं था और जिसके लिए कोई कैमरा भी नहीं लगाया गया था, किसी भी अन्य नृत्य से अधिक सच्चा था।

न कोई फ्लैश था, न मंच। बस दो उम्रदराज़ लोग, बालकनी की रोशनी और एक ऐसा गीत, जिस पर पता नहीं वे पहले कितनी बार नाच चुके थे, किसी और घर में, किसी और उम्र में, उसी कोमलता के साथ।
टिप्पणियों में, सवाल बार-बार दोहराया गया: क्या जीवन भर चलने वाला प्रेम अब भी मौजूद है? वीडियो ने, बिना एक शब्द कहे, पहले ही इसका जवाब दे दिया था।

कभी-कभी प्रेम का इज़हार नहीं किया जाता। उसे धीरे-धीरे नाचा जाता है, जब कोई और नहीं देख रहा होता। 💛
