👴💔 पाओला हर्नांडेज़ ने अपने 89 वर्षीय दादाजी के लिए एक परफेक्ट सरप्राइज़ की योजना बनाने में महीनों बिताए: उन्हें पहली बार वर्ल्ड कप स्टेडियम में प्रवेश करते देखना, उनकी मेक्सिको जर्सी पहने हुए और उत्साह से चमकती आँखों के साथ।

वे दोनों घर से ग्वाडलाहारा, जालिस्को तक साथ यात्रा करके गए। यह सपना रीसेल प्लेटफ़ॉर्म्स पर खरीदे गए टिकटों में लगभग $5,000 का पड़ा।

जब वे स्टेडियम के गेट पर पहुँचे, तो टिकट काम नहीं कर रहे थे। किसी ने जवाब नहीं दिया। कस्टमर सर्विस ने उन्हें घंटों फोन से चिपकाए रखा, जबकि मैच उनके बिना शुरू हो गया। न रिफंड, न समाधान, न प्रवेश।
और इस तरह वह सपना खत्म हुआ: दादाजी स्टेडियम के बाहर एक बेंच पर बैठे थे, अपना पूरा फुटबॉल गियर पहने हुए, अपने सेलफोन की छोटी स्क्रीन पर मैच देख रहे थे। अपनी पोती के बगल में, लेकिन उस जगह से मीलों दूर जहाँ उन्हें होना चाहिए था। 😤

तस्वीरें तुरंत वायरल हो गईं, और आक्रोश एकमत था। क्योंकि अगर एक चीज़ अक्षम्य है, तो वह है किसी ऐसे व्यक्ति से उसका सपना छीन लेना जिसे शायद उसे पूरा करने का फिर कभी मौका न मिले।
पाओला के दादाजी ने सबका दिल छू लिया, और लोग उनका सपना पूरा कराने में मदद के लिए पहले से ही हर संभव कोशिश कर रहे हैं।
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