लुई 2 सितंबर, 2010 को लुइज़ियाना के एक समुद्र तट पर मिला। उसका शरीर तेल से ढका हुआ था और उसे कई चोटें लगी थीं। वह मेक्सिको की खाड़ी में हुए BP तेल रिसाव से बचाई गई पहली जीवित डॉल्फ़िन था। उसे अपने पास रखने वाले विशेषज्ञों ने उसके जीवित बचने की संभावना 5% से भी कम बताई थी।

इसके बाद धैर्य और सहनशक्ति की लंबी परीक्षा शुरू हुई। लुइज़ियाना के बचाव कार्यक्रम की समन्वयक मिशेल केली के अनुसार, उसे अपने दम पर तैरने और खाना खाने लायक बनाने के लिए दिन-रात लगातार 700 घंटे से ज़्यादा देखभाल करनी पड़ी। बचावकर्मियों का यह भी मानना है कि इससे पहले किसी दूसरी डॉल्फ़िन ने उसे टक्कर मारी थी और केली के शब्दों में, तेल उसकी आख़िरी मुसीबत थी।

वह बहुत छोटा था और उसमें जंगल में जीवित रहने के कौशल नहीं थे, इसलिए संघीय अधिकारियों ने उसे वापस छोड़े जाने योग्य नहीं घोषित किया। फरवरी 2011 में वह फ्लोरिडा कीज़ स्थित डॉल्फ़िन रिसर्च सेंटर पहुँचा, जहाँ डॉल्फ़िन अलेटा और डेल्टा ने उसे अपना लिया। आज उसकी उम्र लगभग 16 साल है। एक वायरल पोस्ट में बताया गया है कि डॉल्फ़िन के दिमाग को कुछ नुकसान पहुँचा था और उसकी पसंदीदा गतिविधि पानी की सतह के पास तैरते हुए आगंतुकों का अभिवादन करना है। इसी वजह से उसकी त्वचा को धूप से जलने से बचाने के लिए हर दिन उस पर खास सनस्क्रीन लगानी पड़ती है। आखिरकार, वह बस एक बचाई गई डॉल्फ़िन है, जो उन लोगों का अभिवादन करना चाहती है जिन्होंने उसे सबसे बुरे हालात से बचाया।
