लौव्र में एक घुमावदार पत्थर है जिसे एक ही उद्देश्य से बनाया गया है: किसी को भी वहाँ बहुत देर तक झुककर टिकने से रोकना। वास्तुकार इसे “रक्षात्मक वास्तुकला” कहते हैं—वे विभाजित बेंचें या ढलान वाली सतहें जो आपको किसी भी शहर में दिखती हैं और जिनका उद्देश्य आपको बिना एहसास कराए असहज बनाना होता है।

लेकिन किसी ने इस पत्थर को नहीं बताया था कि एक आगंतुक बिल्कुल सही पेट के साथ आएगा, जो इस डिज़ाइन को चुनौती देगा। जिस वक्र का उद्देश्य शरीरों को दूर धकेलना था, उसने आखिरकार उसके शरीर को ऐसे अपना लिया मानो चट्टान तराशने से पहले किसी इंजीनियर ने उसका नाप लिया हो। 😅

तस्वीर कुछ ही घंटों में वायरल हो गई। कुछ लोगों ने इसे “सर्वोत्तम एर्गोनॉमिक इंजीनियरिंग” कहा, जबकि अन्य ने कसम खाई कि दुनिया के सबसे अधिक देखे जाने वाले संग्रहालय ने गलती से सबसे मुश्किल से मिलने वाली वीआईपी सीट का अनावरण कर दिया है। कभी-कभी सबसे सोच-समझकर बनाया गया डिज़ाइन भी गलत समय पर किसी अजनबी की शारीरिक बनावट से हार जाता है। 🗿

