वह उनकी शादी की शुरुआत से ही उससे यह पूछता आ रहा था। एक बार, दो बार, दस, सौ बार। हमेशा उसी दलील के साथ: कि इससे उनका रिश्ता और गहरा होगा, कि इससे वे और करीब आएंगे, कि यह बस एक खोज है। वह हमेशा ना कहती थी।

फिर एक दिन उसने हां कह दी।

उसके बाद जो हुआ, वह ठीक वैसा नहीं था जैसा उन दोनों में से किसी ने सोचा था। क्योंकि जब कोई जोड़ा उस रेखा को पार करता है—वह रेखा जिसमें “swinging” के नाम पर दूसरे लोगों को अपने बिस्तर में आमंत्रित किया जाता है—तो जो खुलकर सामने आता है, वह हमेशा मुक्ति नहीं होता। कभी-कभी यह आग की ऐसी परीक्षा होती है, जिसके लिए कोई भी शादी कभी पूरी तरह तैयार नहीं होती, चाहे दोनों में से एक ने इसके लिए कितने ही साल क्यों न गुजारे हों। ब्रिटिश टैब्लॉइड Mirror में प्रकाशित इस महिला का बयान बड़ी नैदानिक ठंडक के साथ बताता है कि उसने पहले, दौरान और बाद में क्या महसूस किया: वह असहजता जिसका कोई ज़िक्र नहीं करता, वह जलन जो तब उभरती है जब उसे अब और नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता, और वह सवाल जो बिना जवाब के हवा में लटका रह गया। क्या यह सही फैसला था? 😶

