रॉबर्ट कोसिलेक ने 1990 में अपनी पत्नी चेरिल का गला घोंट दिया। उसने इसे कभी नकारा नहीं।
बीस साल बाद, तब तक मिशेल के नाम से जानी जाने वाली उसने मैसाचुसेट्स राज्य पर मुकदमा दायर किया और दावा किया कि उसकी लिंग-पुनर्निर्धारण सर्जरी से इनकार करना एक कैदी के रूप में उसके अधिकारों का उल्लंघन था। 2002 तक, जेल प्रणाली द्वारा भुगतान किए गए हार्मोन उपचार वह पहले ही प्राप्त कर चुकी थी। 4 सितंबर, 2012 को संघीय न्यायाधीश मार्क वुल्फ ने इससे भी आगे बढ़ते हुए राज्य को पूरी सर्जरी का खर्च उठाने का आदेश दिया और इसके लिए “गंभीर चिकित्सकीय आवश्यकता” तथा क्रूर और असामान्य दंड के विरुद्ध संवैधानिक सुरक्षा का हवाला दिया।

जेल अधिकारियों ने जेल के भीतर स्वयं कोसिलेक की सुरक्षा के लिए जोखिमों की चेतावनी दी थी। इनमें से किसी भी बात ने इस फैसले को नहीं रोका। चेरिल का परिवार आक्रोश से फट पड़ा: करदाताओं का पैसा उस व्यक्ति के भरण-पोषण के लिए खर्च हो रहा था जिसने उनकी बेटी की जान ले ली थी। मामले में अपील हुई और वर्षों बाद उच्चतर अदालतों ने इस फैसले को पलट दिया, लेकिन तब तक यह नज़ीर पूरे देश को झकझोर चुकी थी।

