
अरस्तू ने इसे 2,400 साल पहले ही देख लिया था: ऐसी लकड़ी जो अंधेरे में अपने आप चमकती है। लेकिन अब तक, कोई भी इस घटना को प्रयोगशाला में नियंत्रित तरीके से पुन: उत्पन्न नहीं कर पाया था।
स्विट्जरलैंड के सेंट गैलेन स्थित EMPA संस्थान के शोधकर्ता फ्रांसिस श्वार्त्से की टीम ने यह काम बॉल्सा लकड़ी में Desarmillaria tabescens फंगस, जिसे ‘ringless honey fungus’ के नाम से भी जाना जाता है, को संचारित करके किया। यह जीव स्वाभाविक रूप से लुसिफेरिन पैदा करता है, वही पदार्थ जो जुगनुओं को चमकाता है। जब यह लुसिफेरिन हवा के संपर्क में आता है, तो एक एंजाइमीय प्रतिक्रिया सक्रिय हो जाती है और लकड़ी 560 नैनोमीटर की तरंगदैर्ध्य के साथ हल्की हरी रोशनी छोड़ने लगती है। अधिकतम चमक लगभग दस घंटे बाद आती है, और पूरी तैयारी प्रक्रिया में लगभग दस दिन लगते हैं।
शोधकर्ताओं द्वारा कल्पित उपयोगों में पार्कों में पर्यावरण-अनुकूल संकेतों से लेकर इंटीरियर डिज़ाइन, आभूषण और ऐसा फर्नीचर शामिल है जो ऊर्जा खर्च किए बिना चमकता है। यदि यह तकनीक बड़े पैमाने पर लागू होती है, तो आपके घर में ऐसा पदार्थ हो सकता है जो केवल एक फंगस और हवा की मदद से रोशनी करे। 🌿
