जहां दूसरे कोच मोबाइल फोन तक पर पाबंदी लगा देते हैं, वहीं डिक एडवोकाट ने बिल्कुल अलग दिशा अपनाई 😂

वर्ल्ड कप में अपने ऐतिहासिक डेब्यू में — इक्वाडोर के खिलाफ उस शानदार ड्रॉ के साथ, जो पहले ही टूर्नामेंट की लोककथा का हिस्सा बन चुका है — क्यूरासाओ ने दिखा दिया कि उसका ट्रेनिंग कैंप वर्ल्ड कप में सबसे ज्यादा आरामदेह है। राष्ट्रीय टीम के मेडिकल स्टाफ के एक सदस्य ने Ge Globo को दिए एक इंटरव्यू में पुष्टि की कि टूर्नामेंट के दौरान कई हफ्तों तक फुटबॉलरों को अपनी पत्नियों और पार्टनरों के साथ कमरा साझा करने की अनुमति है। हां, आपने सही पढ़ा। 💙

यह फैसला डच कोच डिक एडवोकाट ने एक सरल लेकिन दमदार तर्क के साथ लिया: खिलाड़ियों के लिए अधिक आरामदायक माहौल बनाना। न कोई मठ जैसी तन्हाई, न बोर्डिंग-स्कूल जैसे नियम। अगर लड़के आराम में हैं, तो वे बेहतर प्रदर्शन करते हैं। तर्क बेहद मजबूत है… हालांकि सोशल मीडिया पर एक दूसरी तरह की “तर्क” के साथ टिप्पणियां जल्दी ही आने लगीं 😂🔥

जो बात साफ है, वह यह कि क्यूरासाओ वर्ल्ड कप में बिना किसी झिझक के, किसी की नकल किए बिना, और ऐसी सोच के साथ पहुंचा है जिसे बाकी राष्ट्रीय टीमें लागू करने की हिम्मत कभी नहीं करेंगी। क्या यही उसके ऐतिहासिक डेब्यू की कुंजी हो सकती है? 👀

