शौचालय फ्लश करते समय लगभग कोई भी इस बारे में नहीं सोचता।
2015 में जर्नल Critical Reviews in Environmental Science and Technology में प्रकाशित एक वैज्ञानिक समीक्षा के अनुसार, किसी व्यक्ति द्वारा प्रतिदिन उत्सर्जित मल की मध्यिका मात्रा लगभग 128 ग्राम होती है। एक साल के दौरान, यह मात्रा प्रति व्यक्ति लगभग 47 किलोग्राम हो जाती है।

Rose और उनके सहयोगियों ने कई अध्ययनों से जुटाए गए आँकड़ों के आधार पर यह शोध किया। इसमें यह भी सामने आया कि यह मात्रा आहार, खासकर फाइबर के सेवन, के आधार पर काफी बदल सकती है। इसके अलावा, मल के वजन का लगभग 75% पानी होता है, जबकि बाकी हिस्से में बैक्टीरिया, फाइबर और अन्य अपचित पदार्थ, खनिज तथा शरीर से स्वाभाविक रूप से झड़ी कोशिकाएँ होती हैं।

हालाँकि यह कोई बहुत आकर्षक विषय नहीं है, फिर भी मल पोषण, माइक्रोबायोटा और आंतों के स्वास्थ्य के बारे में जानकारी दे सकता है। स्वच्छता प्रणालियों को समझने और उनकी रूपरेखा तैयार करने के लिए इसका अध्ययन करना महत्वपूर्ण है।
