ऑलिव ने पहले कभी अपने पंजों पर बारिश महसूस नहीं की थी।
वह आंगन के बीचोंबीच स्थिर खड़ी रही, गीले पत्थर पर गिरती बूंदों को देखती रही, यह नहीं जानती थी कि आगे बढ़े या वहीं जमी रहे। उसके छोटे डैशहंड पिल्ले जैसे कान भीगकर लटक गए थे, और उसकी आंखें, जिज्ञासु भी और डरी हुई भी, छिपने के लिए कोई जगह तलाशती रहीं। हर बूंद उसे ऐसी नई चीज लग रही थी, जिसे वह समझ नहीं पा रही थी।


कुछ मिनट बाद, दृश्य पूरी तरह बदल गया: ऑलिव सरसों के रंग के कंबल के अंदर क्रोइसां की तरह सिमटी हुई दिखाई दी, उसका सिर अंदर छिपा था और शरीर गर्म था, मानो वह कपड़ा दुनिया की सबसे सुरक्षित पनाह हो। बस एक कंबल और थोड़ी गर्माहट ने बारिश के उसके डर को दिन की सबसे गहरी नींद में बदल दिया।
