वह बेहद थकान से अपनी आँखें बंद कर बैठी और उसने, बिना एक भी शब्द कहे, अपनी छोटी-सी बाँहें उसके चारों ओर लपेट दीं ताकि उसे चोट न लगे।
मेट्रो के डिब्बे में—पीछे ट्रेन के शोर के बीच और यात्री अपने फोन देखते हुए—इस लड़के ने उस सीट को अपनी माँ के लिए दुनिया की सबसे सुरक्षित जगह बना दिया। उसने उसे जगाया नहीं, उसने शिकायत नहीं की, वह हिला तक नहीं। वह बस वहीं रहा, उसे थामे हुए, सफर के हर मोड़ पर ध्यान देता हुआ मानो वही उसका सबसे महत्वपूर्ण काम हो।
कभी-कभी सबसे बड़ा प्यार सबसे नन्हीं बाँहों में समा जाता है। ❤️
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