अवंति रेड्डी केवल 4 साल की थीं और लाम्बाडी जनजातीय नृत्य कर रही थीं, तभी सफेद कपड़े पहने एक महिला उनके पास आईं और उन्हें जमीन से उठा लिया।
यह 14 फरवरी, 1992 का दिन था और भारत के हैदराबाद स्थित एक स्कूल में यह घटना हुई। राजकुमारी डायना ने उन्हें कैमरों के सामने अपनी गोद में बिठाया, देखा कि लड़की को हल्की सर्दी थी और धीरे से अपने ही रूमाल से उसकी नाक पोंछी। फिर उन्होंने उनसे ऐसी बात कही जिसे अवंति कभी नहीं भूलीं: ‘मेरी कोई बेटी नहीं है, इसलिए आज से तुम मेरी बेटी हो।’ कुछ सप्ताह बाद उस पल की फ्रेम की हुई और हस्ताक्षरित तस्वीर डाक से पहुँची।


तीन दशक से अधिक समय बीत चुका है। डायना की 1997 में मृत्यु हो गई, तब अवंति केवल दस वर्ष की थीं और बेल्जियम के दौरे पर रहते हुए उन्हें यह खबर मिली। आज, 37 वर्ष की उम्र में, अवंति अब भी उस तस्वीर को अपने बचपन की सबसे अनमोल याद के रूप में संजोकर रखती हैं।

