उसके पिता की स्टेज 4 कैंसर से हुई मौत वह निर्णायक झटका थी, जिसने उसे अपनी ज़िंदगी पूरी तरह बदलने का फैसला लेने पर मजबूर किया।

जोशुआ इतना भारी हो गया था कि सीढ़ियों की एक मंज़िल चढ़ते ही उसकी सांस फूल जाती थी।

आठ महीनों तक उसने न कोई गोली छुई, न कोई चमत्कारी शेक: उसने अपने शरीर में जाने वाली हर कैलोरी गिनी और उन्हें प्रतिदिन 1,700 तक सीमित रखा—एक ऐसी संख्या जिसे कोई भी पोषण विशेषज्ञ सख्त, लेकिन चरम नहीं मानेगा।

न कोई क्रैश फास्ट, न सर्जरी। बस अनुशासन, जिसे लगातार 240 बार, दिन-ब-दिन दोहराया गया, जब तक कि तराज़ू यह दिखाने न लगा कि शुरुआत की तुलना में उसका वजन 57 किलो कम हो चुका था।

बदलाव सिर्फ आईने में नहीं था। उसके कपड़े उसे फिट नहीं आते थे, उसका चेहरा इस हद तक बदल गया था कि दोस्त सड़क पर उसे पहचान नहीं पाते थे, और उसका पूरा शरीर मानो नए सिरे से बनाया गया हो।

उसके वायरल होने की वजह डाइट खुद नहीं, बल्कि उसकी रफ्तार थी: गर्भावस्था पूरी होने में जितना समय लगता है, उतने समय में जोशुआ एक अलग इंसान बन गया।
