बारह साल तक खड़े रहना। बिना बैठे। बिना लेटे। थकान के आगे एक पल के लिए भी झुके बिना। यही वह साधना है, जिसका पालन दुलाल गिरि जी महाराज, जिन्हें भारत में ‘स्टैंडिंग बाबा’ के नाम से जाना जाता है, शिव देवता के प्रति पूर्ण भक्ति के व्रत के रूप में कर रहे हैं।

इस साधना का अपना एक नाम है: ‘खड़ेश्वर’ या ‘खड़ा तपस्या,’ जिसे हिंदू धर्म के भीतर तपस्या के सबसे चरम रूपों में से एक माना जाता है। जो लोग इसे अपनाते हैं, उनका मानना है कि लगातार शारीरिक कष्ट कोई कीमत नहीं, बल्कि ज्ञानोदय का वही मार्ग है। दुलाल ने स्वयं को पूरी तरह इसके लिए समर्पित करने हेतु अपनी विश्वविद्यालय की पढ़ाई छोड़ दी। उनका घोषित लक्ष्य शिव के प्रत्यक्ष दर्शन प्राप्त करना है, दिव्य उपस्थिति का एक ऐसा संकेत जो उनके लिए पिछले बारह वर्षों के हर दिन को सार्थक ठहराता है।

इसके प्रलेखित शारीरिक परिणाम गंभीर हैं और यह दिखाते हैं कि इतना लंबा समय मानव शरीर पर क्या असर डालता है। यह साधना भारत में सदियों से मौजूद है, लेकिन यह स्वयं हिंदू धर्म के भीतर भी विवाद पैदा करती है। इस मामले में चरम भक्ति और आत्म-विनाश के बीच की रेखा इतनी पतली है कि उसे खींच पाना लगभग असंभव है।

