नेपाल की त्रिशूली घाटी में 26 अगस्त की सुबह 9:20 बजे थे। 🏔️

त्रिभुवन त्रिशूली माध्यमिक विद्यालय के 47 वर्षीय प्रधानाचार्य राजेंद्र ददाबी को बेत्रावती में रहने वाले एक मित्र का फोन आया, जो नदी की धारा के ऊपर की ओर आठ किलोमीटर दूर था: पानी बेहद तेज़ी से आ रहा था।


स्कूल के अंदर पहले से ही 900 छात्र मौजूद थे और 700 अन्य वहाँ पैदल आ रहे थे। हिचकिचाने का समय नहीं था।


कुछ ही मिनटों में उन्होंने 1,643 छात्रों को ऊँची ज़मीन पर पहुँचा दिया और उन्हें एक बोधि वृक्ष के नीचे इकट्ठा किया, जबकि तीन मंज़िला इमारत पानी के नीचे गायब हो गई।


तिब्बत की सीमा के पास एक हिमनद के ढहने से बर्फ, चट्टानों और कीचड़ की ऐसी बाढ़ आई, जिसने नुवाकोट ज़िले के पूरे-के-पूरे गाँव बहा दिए।
उस दिन स्कूल के दो कर्मचारियों की मौत हो गई, लेकिन कोई भी छात्र पीछे नहीं छूटा।
नेपाल में सैकड़ों लोगों की जान ले चुकी और हज़ारों लोगों को लापता कर चुकी इस त्रासदी के बीच, एक शिक्षक के फैसले ने 1,643 परिवारों के लिए जीवन और मृत्यु के बीच का अंतर तय कर दिया। 🙌
