उन्होंने उसे मैनहैटन के एक पार्क में अकेले घूमते हुए पाया। उसके पंख, जो सफेद होने चाहिए थे, पूरी तरह चमकीले गुलाबी रंग में रंगे हुए थे। 🕊️💗

WILD BIRD FUND के बचावकर्मियों ने उसका नाम फ्लेमिंगो रखा और उन्हें शक है कि किसी ने उसे बच्चे की जेंडर-रिवील पार्टी के लिए जीवित सजावट के रूप में रंग दिया था, एक ऐसा चलन जिसके कारण पहले भी ऐसे ही पीड़ित सामने आ चुके थे। जब उन्होंने उसे पाया, तब वह कुपोषित और बेहद कमजोर थी और मुश्किल से खड़ी हो पा रही थी।

टीम ने उसके शरीर से रंग साफ करने की पूरी कोशिश की, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। उन्हें शक है कि रंग में मौजूद रसायनों और कई दिनों तक उसके द्वारा सांस के साथ अंदर लिए गए धुएं ने उसके फेफड़ों को अपूरणीय क्षति पहुंचाई। बचाव के कुछ दिनों बाद फ्लेमिंगो की मौत हो गई और उसके साथ किए गए कृत्य की जिम्मेदारी किसी ने नहीं ली। 💔

