बचपन में लुइस डियाज़ के पास अर्जेंटीना की सिर्फ़ एक जर्सी थी और एक ऐसा झूठ था जिसे वह गर्व से दोहराता था: कि मेसी ने वह जर्सी उसे दी थी। उसके दोस्त उस पर सिर्फ़ इसलिए विश्वास करते थे क्योंकि वह समूह का नेता था।
वर्षों बाद, जब आखिरकार वह अपने आदर्श से मिला, तो उसने बिना बदले में कुछ पाने की उम्मीद के उसे पूरी कहानी बता दी। मानो किसी मासूम झूठ को कबूल कर रहा हो।

मेसी ने उसकी बात सुनी और ऐसी बात कही जिसे लुइस कभी नहीं भूल पाया: ‘वह जर्सी मेरे पास लाओ, मैं उस पर तुम्हारे लिए हस्ताक्षर कर दूँगा और हम उस झूठ को सच में बदल देंगे।’

लेकिन बात यहीं खत्म नहीं हुई। मेसी ने खुद लुइस से उसकी जर्सी माँगी और जब उसे जर्सी मिल गई, तो हँसते हुए कहा: “अब अपने दोस्तों को बताओ कि मेसी ने तुमसे तुम्हारी जर्सी माँगी थी”.
लुइस डियाज़ इसे एक सरल वाक्य में समेटते हैं: “वह बहुत विनम्र और संकोची थे। वह हमेशा से मेरे आदर्श थे”। मेसी ने लुइस द्वारा बचपन में गढ़ी गई कहानी को सच में बदल दिया और वह जर्सी उसे वापस दे दी।
