15,000 से अधिक पोस्टमॉर्टम कर चुके एक फॉरेंसिक डॉक्टर ने ऐसा मामला पहले कभी नहीं देखा था। जब डॉ. संतु बाग ने 35 वर्षीय आनंद यादव के गले में चीरा लगाया, तो उन्हें 20-सेंटीमीटर का एक चूजा U-आकार में फंसा मिला, जो एक ही समय में श्वासनली और अन्ननली दोनों को अवरुद्ध कर रहा था। वह पक्षी अभी भी जिंदा था।

यादव को 14 दिसंबर, 2024 को भारत के छत्तीसगढ़ राज्य के अंबिकापुर के एक अस्पताल में मृत अवस्था में लाया गया था। नहाने के कुछ ही देर बाद वह अपने घर में गिर पड़े थे, और शुरू में डॉक्टरों को उनके अंगों में कुछ भी असामान्य नहीं मिला। उनकी मौत का असली कारण—दम घुटना—केवल पोस्टमॉर्टम टेबल पर सामने आया।

छिंदकालो गांव के पड़ोसियों के अनुसार, एक स्थानीय तांत्रिक ने उसे यह विश्वास दिलाया था कि जिंदा चूजा निगलने से उसकी बांझपन की समस्या ठीक हो जाएगी। यादव और उनकी पत्नी की शादी को कई साल हो चुके थे, लेकिन वे बच्चे पैदा नहीं कर पाए थे। इस मामले की पुलिस जांच कर रही है। भारत में लगभग 27.5 million लोग बांझपन से पीड़ित हैं, और इन विट्रो फर्टिलाइजेशन जैसे चिकित्सीय उपचारों की सफलता दर साबित हो चुकी है—एक ऐसी बात, जिस पर दुखद रूप से यादव ने कभी विचार ही नहीं किया। 🐣

