क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि 192 घंटे पूरी अंधेरी जगह में फंसे रहना, बिना पानी, बिना भोजन, और यह महसूस करना कि कंक्रीट आपकी हड्डियों और आपकी उम्मीदों को कुचल रहा है? 😭💔


निर्दयी भूकंप के बाद हर्नान गिल ने इंसानी दुःस्वप्न का सबसे भयावह रूप खुद झेला। जब बचावकर्मी अब जीवित बचे लोगों को नहीं बल्कि लाशों को खोज रहे थे, तब असंभव घटित हुआ।
उसकी यह दिल दहला देने वाली गवाही कि वह पागलपन की कगार पर भी कैसे जीवन से चिपका रहा, आपको सिहरन दे देगी।

हर्नान गिल, 43, Catia La Mar में एक रिहायशी इमारत के बेसमेंट में सुरक्षा गार्ड के रूप में काम कर रहा था, तभी 7,5 तीव्रता से धरती कांपी और इमारत उसके ऊपर ढह गई। वह भागा नहीं। वह एक मेज और एक कुर्सी के नीचे घुस गया, और वही सहज प्रतिक्रिया उसे पूरे आठ दिनों तक जीवित रख सकी।
बाहर, सात देशों की बचाव टीमें बिना थके खुदाई करती रहीं। उसे तक पहुंचने के लिए तीन मीटर की सुरंग खोलने में 100 घंटे से अधिक का काम लगा। गिल बाहर निकला तो उसकी कॉलरबोन खिसकी हुई थी, कुछ चोटें थीं, लेकिन वह होश में था और बोल रहा था।
Hospital de Clínicas Caracas में अपने बिस्तर से उसने कहा कि अंधेरे में उसने कभी भगवान से बात करना बंद नहीं किया। “मुझे पता है कि यह एक चमत्कार था”, उसने कहा।
उसकी पत्नी, Gusbimar González, और उसके बच्चे वीडियो कॉल के दूसरी ओर पहले से उसका इंतजार कर रहे थे।
हर्नान गिल की कहानी एक कठोर और साथ ही सुंदर याद दिलाती है कि जीवन एक सेकंड में बदल सकता है, लेकिन यह भी कि आस्था से जुड़ी मानवीय इच्छाशक्ति भौतिकी के किसी भी नियम को तोड़ने में सक्षम है। नरक में फंसे हुए, उसने स्वर्ग पा लिया।
