Yayoi Kusama 97 वर्ष की आयु में टोक्यो के एक अस्पताल में चल बसीं, उसी जगह, जहाँ वह अपनी इच्छा से तीन दशकों से अधिक समय से रह रही थीं।

उन्होंने 1990 में खुद को वहाँ भर्ती कराया। किसी क्षणिक संकट के कारण नहीं, बल्कि वहीं रहने के लिए। उन दीवारों के बीच, वह हर दिन चित्र बनाती रहीं।

दस वर्ष की उम्र से ही उन्होंने अपनी भाषा खोज ली थी: बिंदु, जाल और मेहराबें, जो अंतहीन रूप से दोहराए जाते थे, मानो उन्हें हर खाली जगह भर देनी हो, ताकि दुनिया उन्हें पूरी तरह निगल न जाए।

वही जुनून, जिसने उन्हें खुद को दुनिया से अलग कर लेने पर मजबूर किया था, अंततः अपने आप पूरी दुनिया में फैल गया। 1993 में उन्होंने वेनिस बिएनाले में जापान का प्रतिनिधित्व किया—ऐसा करने वाली वह पहली कलाकार थीं। 2022 में उनकी एक पेंटिंग 10,5 मिलियन डॉलर में बिकी।

उनकी कंपनी ने 26 अगस्त को उनकी मृत्यु की घोषणा की, हालांकि उनकी मृत्यु बारह दिन पहले ही हो चुकी थी। बयान में एक सरल और विराट बात कही गई थी: वे अंत तक चित्र बनाती रहीं और उन्होंने अपनी कूची कभी नीचे नहीं रखी।
वे दुनिया की तलाश में बाहर नहीं निकलीं। वे स्थिर रहीं, और दुनिया ही उनके लिए कतार में आ गई।
