Carlos Henrique ब्राज़ील में एक मास मना रहे थे, तभी सब कुछ थम गया। श्रद्धालुओं के बीच बैठे एक दादा को अपने पोते के निधन की खबर मिली। वह सबके सामने फूट-फूटकर रो पड़े।

पादरी ने एक पल की भी हिचकिचाहट नहीं दिखाई। उन्होंने वेदी पर पवित्र वस्तुएँ छोड़ दीं, प्रार्थनागृह के मध्य भाग में नीचे उतरकर उन्हें गले लगा लिया। उन्होंने कुछ नहीं कहा। बस चुपचाप उन्हें थामे रहे, जबकि वह व्यक्ति यह समझने की कोशिश कर रहा था कि उस दर्द के बोझ के साथ सांस कैसे ली जाए।

कुछ ही घंटों में वह वीडियो पूरी दुनिया में फैल गया। लाखों लोगों ने उस आलिंगन में वह देखा जिसे बहुत कम शब्द व्यक्त कर सकते हैं: कि कभी-कभी आस्था अनुष्ठान में नहीं होती, बल्कि उसमें होती है जो सब कुछ बिखर जाने पर आपको संभालकर रखता है।
