शेरू केवल एक वर्ष का था, जब उसने भारतीय रेलवे के सेवा कुत्ते के रूप में काम करना बंद कर दिया।
बेल्जियन मैलिनॉइस नस्ल के इस कुत्ते की ब्रेन ट्यूमर के लिए सर्जरी हुई थी, लेकिन ट्यूमर फिर लौट आया और बढ़ता रहा। इसी तरह रेलवे व्यवस्था में सेवा दे चुका यह युवा कुत्ता ब्लू क्रॉस ऑफ इंडिया के आश्रय में पहुँचा, जो चेन्नई में स्थित एक पशु कल्याण संगठन है।

संगठन के मुताबिक़, शेरू अपने साथ कुछ ख़ास लेकर आया था: अनुशासन, आज्ञाकारिता और मिलनसार स्वभाव। वहाँ बिताए महीनों के दौरान, वह महज़ एक और निवासी बनकर नहीं रह गया। कर्मचारी उसे हर दिन देखते, उसकी देखभाल करते और उसकी शांत शक्ति व कुलीनता के मुरीद होते गए, जब तक कि वह उनकी दिनचर्या का हिस्सा नहीं बन गया और उसने सबका दिल नहीं जीत लिया।
हाल ही में, बीमारी से जुड़ी जटिलताओं के कारण शेरू की मृत्यु हो गई। ब्लू क्रॉस ने उसे रेलवे सेवा का नायक और अपने परिवार का सदस्य बताते हुए विदाई दी, और आभार जताया कि अपने अंतिम महीनों में उसे देखभाल, दयालुता और प्यार मिला।
““स्वच्छंद दौड़ो, बहादुर दोस्त””, उन्होंने विदाई देते हुए लिखा।

