Stephen King ने अपनी नाक में दवा की दुकान वाली रुई ठूंस रखी थी ताकि खून टपककर उनके टाइपराइटर की कुंजियों पर न गिरे। यह उनके किसी उपन्यास का दृश्य नहीं था: 1980 के दशक के बड़े हिस्से में यही उनकी काम करने की दिनचर्या थी।

‘The Shining’ और ‘It’ के लेखक ने स्वीकार किया कि उनकी कोकीन की लत इतनी चरम पर पहुंच गई थी कि सुबह के शुरुआती घंटों में लिखते समय उनका दिल 130 beats per minute की रफ्तार से धड़क रहा था। उस बदली हुई अवस्था का नतीजा 20वीं सदी के लोकप्रिय साहित्य की कुछ सबसे ज्यादा बिकने वाली कृतियां थीं। विरोधाभास यह है: King ने खुलकर माना कि उन्हें उन किताबों में से कई को लिखना याद नहीं है। पूरे के पूरे पन्ने, संपूर्ण कथानक, ऐसे पात्र जिन्हें लाखों पाठक जुबानी जानते हैं, एक ऐसे मन से जन्मे जिसे वह खुद अब दोबारा जोड़कर नहीं देख सकते।

आखिरकार उनकी पत्नी, Tabitha King, ने ही इस गिरावट के सबूत इकट्ठा किए और 1987 में परिवार की ओर से एक हस्तक्षेप आयोजित किया। मेज पर उन्होंने सिगरेट के टोंटे, थैलियां, बोतलें और कागज रखे। King ने इलाज स्वीकार कर लिया। जो सवाल अब भी बाकी है, वह यह कि उनकी कितनी सबसे अंधेरी कहानियां वास्तव में उसी गर्त से पैदा हुई थीं।

