Jill Price कुछ भी नहीं भूलतीं। 🧠
उन्हें अपने जीवन के किसी भी वर्ष की कोई भी तारीख बता दीजिए, और वे आपको बता देंगी कि वह सप्ताह का कौन-सा दिन था, उन्होंने क्या किया, क्या खाया और उस रात टेलीविजन पर कौन-सी खबरें चल रही थीं। उनका जन्म 1965 में दक्षिणी कैलिफ़ोर्निया में हुआ था और बचपन से ही उनका मस्तिष्क हर पल को ऐसे संग्रहित करने लगा, जैसे वह कल ही हुआ हो।
2000 में उन्होंने न्यूरोलॉजिस्ट James McGaugh से मदद मांगी। वे अपनी ही डायरी में डूबी हुई थीं और ऐसे अवसाद में फंसी थीं, जिसे कोई समझ नहीं पा रहा था। अंततः उनका मामला वैज्ञानिक पत्रिका Neurocase में उनकी पहचान की रक्षा के लिए पहले “AJ” के आद्याक्षरों के तहत प्रकाशित हुआ। डॉक्टरों ने उनमें हाइपरथाइमेसिया का निदान किया—यह एक ऐसी दुर्लभ अवस्था है, जिसके दुनिया भर में आज केवल मुट्ठी भर मामले ही ज्ञात हैं।

क्योंकि सब कुछ याद रखना कोई महाशक्ति नहीं है: इसका अर्थ है हर नुकसान, हर शर्मिंदगी और हर पीड़ा को उसी तीव्रता से फिर से जीना, जैसी पहले दिन थी। Jill ने अपनी कहानी बताने के लिए 2008 में एक किताब लिखी। उनकी कहानी इस साल फिर से वायरल हुई, और यह अब भी हवा में एक सवाल छोड़ जाती है: क्या आप सचमुच सब कुछ याद रखना चाहेंगे? 🤯
