फ़ॉक्स राइकर ने 4 साल की उम्र तक एक शब्द भी नहीं कहा।
उस उम्र में, उसमें मध्यम स्तर के ऑटिज़्म का निदान हुआ और डॉक्टरों ने उसके परिवार से साफ़-साफ़ कह दिया: वह कभी स्वतंत्र जीवन नहीं जी पाएगा। कोई भी इस बात को अंतिम फैसला मान लेता। लेकिन संयुक्त राज्य अमेरिका में उसके परिवार ने इसे नियति नहीं, बल्कि महज़ एक और राय मानने का फैसला किया और संचार तथा सामाजिक कौशल पर केंद्रित कई वर्षों की थेरेपी शुरू की। उन्होंने स्कूल भी कई बार बदले, जब तक उन्हें वह जगह नहीं मिल गई जहाँ फ़ॉक्स सचमुच सीख रहा था।

वह बड़ा हुआ, भौतिकी में सम्मान सहित स्नातक किया और पेनसिल्वेनिया के एक अस्पताल में आपातकालीन चिकित्सा तकनीशियन के रूप में काम किया। जब मेडिकल स्कूल में आवेदन करने का समय आया, तो उसके आसपास लगभग सभी लोगों ने सुझाव दिया कि वह आवेदन में अपने ऑटिज़्म का ज़िक्र न करे। फिर भी उसने इसका उल्लेख किया, क्योंकि यह उसके व्यक्तित्व का हिस्सा है।

आज वह चिकित्सा की पढ़ाई कर रहा है और अपनी कहानी साझा करता है, ताकि जब दूसरे परिवारों को ऐसा निदान मिले जो किसी सीमा जैसा लगता है, तो उनके पास थामे रहने के लिए कुछ हो।