एक चीनी महिला की उम्र 70 वर्ष से अधिक थी और वह एक दशक से भी अधिक समय से मस्तिष्कीय थ्रॉम्बोसिस से जूझ रही थी। इसके अलावा, उन्हें कैंसर भी था, जिसे डॉक्टर पहले ही असाध्य मान चुके थे।

8 सितंबर को हेबेई प्रांत के कांगझोउ के हेजियान स्थित एक गांव में उनके परिवार को जीवन के कोई संकेत नहीं मिले। दूर रहने वाले रिश्तेदारों के आने का इंतज़ार करते हुए उन्होंने उन्हें ठंडा रखने वाले ताबूत में रख दिया। लेकिन अगली रात उनकी बहू ने कुछ सुना: भिनभिनाहट, एक कराह, ऐसी आवाज़ जो बंद ताबूत से नहीं आनी चाहिए थी। परिवार ने उन्हें तुरंत बाहर निकाल लिया।

11 सितंबर तक महिला को कुछ होश आ गया था। उन्होंने अपनी आँखें खोलीं, हालांकि वह खा-पी नहीं सकती थीं और उनकी हालत गंभीर बनी हुई थी। उसी रात उनकी मृत्यु हो गई, इस बार हमेशा के लिए। उन्हें 13 सितंबर को दफना दिया गया। बाद में गांव के एक अधिकारी ने बताया कि ताबूत को रेफ्रिजरेशन मोड में रखा गया था, डीप-फ्रीज़िंग मोड में नहीं, जिससे उनके कमज़ोर लेकिन मौजूद जीवन-चिह्न फिर से दिखाई देने लगे। चीनी डॉक्टर इसे “प्रत्यक्ष मृत्यु” कहते हैं: नाड़ी इतनी धीमी कि उसे पूर्ण निस्तब्धता समझ लिया जा सकता है।
